ज्यादातर हिंदुस्तानी औरतें अपने आदमी को पागल क्यों समझती हैं?
जब पुरुष शादी के बाद 6 महीने घुटनो पर बैठ कर या स्त्री के आगे-पीछे घूम कर 'मिमियाता' है, उसकी चिरौरी करता है, तो पत्नियाँ ऐसे पुरुष को 'दो कौड़ी का इन्सान' समझने लगती हैं।
अब ऐसे में स्त्री कोई गलती भी करे और पति उस पर नाराज हो,तो वह पति की डांट को कोई तवज्जो इसलिए नहीं देती, क्योंकि वह अच्छी तरह जानती है कि डांटने वाला यह हवस का भूखा रात को 11 बजते ही उसके(पत्नी के) तलवे चांटेगा।🤣
तो, अब पत्नी की निगाह में पुरुष को 'दो कौड़ी का इन्सान' कहो या पागल,बात एक ही है।
सैक्स जैसी बेहूदा हरकत करते हुए पुरुष किधर से इन्सान दिखता है, कोई बताए?🤣
उत्तेजित पुरुष,नंगा बदन और सैक्स की एक्सरसाइज (पुश एन पुल) —क्या अजब तमाशा है भई ?
आज तक ये बात समझ नहीं आई कि इन्सान सैक्स जैसी तीसरे दर्जे की बेहूदा और घटिया हरकत करते ही क्यों हैं?
युवा उम्र में हार्मोन्स के कारण तीव्र कामेच्छा पैदा होने का दावा करने वाले जबाब दें कि जब लड़के और लड़कियां आजकल 29–30 की भरी जवानी की उम्र तक आराम से कुँवारे रह सकते हैं, तो फिर आगे भी ओखली में मुहँ डालने की जरूरत क्या है?
गौर फरमाइये—जब 29–30 की उम्र तक इन युवाओं को कोई 'जिस्मानी इमरजैन्सी'(आपात स्थिति) पैदा नहीं हुई ,तो यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि शादी सिर्फ एक 'भेड़ चाल' है, जिस्मानी जरूरत तो कतई नहीं!
इस उम्र के बाद तो जवानी का 'उफान' भी ढलने लगता है! ज़रा सोचिये, इतनी बड़ी जिस्मानी जरूरत होती तो क्या वे 29–30 की उम्र तक कुँवारे और बिना शादी किये रह सकते थे?
तो फिर, कोई माने या न माने,शादी सिर्फ आँखें बन्द करके एक "भेड़चाल" के तहत इसलिए की जा रही हैं कि दोस्तों या सहेलियों ने कर ली, तो चलो हम भी कर लेते हैं।😂
यानि सारी गलती हकीकत में हमारे समाज की है।
असल सच्चाई यह है कि तम्बाकू,सिगरेट ,शराब से दूर रहने के लिये तो ये समाज डंडा हाथ में लेकर अपनी संतानों को सख्ती से रोकता है,मगर सैक्स के मामले में चुप्पी क्यों साध जाता है?
और तो और, कोई पण्डित किसी की बेटी/ बेटे की शादी के लिये किसी परिवार की ओर से कोई प्रस्ताव लेकर आए,तो उसको रबड़ी मलाई खिला कर ढोल-मंजीरे बजाए जाते हैं!😂
शादी के लिये दूल्हा जब बारात लेकर जा रहा होता है,तो नशे में टल्ली बारातियों के डी जे के गानों पर मस्ती में थिरकते जिस्म नई उम्र के किशोरों को एक बेहूदा (हाँ बेहूदा) सन्देश दे जाते हैं। वे सोचते हैं शादी और सैक्स कोई बहुत मजे की चीज है?
यानि सैक्स के मामले में समाज बहुत ही लचीला रुख अपनाए हुए है।वजह साफ है कि समाज के ये ठेकेदार खुद भी हवस के भूखे हैं। मौका मिलने पर कभी भी चूकने वाले नहीं!😜
'जहर' को खतरा बता कर सारी दुनिया उसे छूने से भी मना करती आई है।मगर किसी ने कभी अपनी युवा होती संतान से क्यों नहीं कहा कि " सैक्स एक बेहूदा हरकत है,दूर रहो इससे?"
स्त्री यह भी देख रही होती है कि पुरुष अपनी हवस शान्त करने के लिये उसे किस कदर एक पागल की तरह नौंच- खसोट रहा है!मतलब पुरुष सैक्स करते समय अपना आपा खो बैठता है। उस वक़्त वह भूल जाता है कि वह एक इन्सान है!
अब ऐसे में स्त्री उसे पागल जैसी हरकतें करते देखेगी,तो पागल ही तो कहेगी !😂
यानि आपके सवाल का जबाब 'सैक्स से जुड़ी बेहूदा' हरकतें हैं।न ये बेहूदा हरकतें होतीं, न कोई किसी को पागल समझती?

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